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Thursday, 22 September 2022

वृंदावन में खुलेगा दिल्ली का मशहूर मदर्स लैप, मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर

सालों से राजधानी दिल्ली के मरीजों के लिए विश्वास का नाम बन चुका मदर्स लैप सेंटर अब अपने शहर वृंदावन  में भी खुलने जा रहा है। सुनरख इलाके में जल्द ही खुलने जा रहे मदर्स लैप, मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर में तमाम आधुनिक सुविधाएं मरीजों को मिलेंगी। आने वाले दिनों में इस सेंटर में नवजात बच्चों और प्रसूति विभाग की सभी आधुनिक सेवाएं आपको एक ही छत के नींचे प्राप्त हो सकेंगी। इसके साथ ही वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ और मदर्स लैप, मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर की डायरेक्टर डॉक्टर शोभा गुप्ता के अनुभवी परामर्श का लाभ भी वृंदावन के मरीजों को मिल सकेगा।

मदर केयर और चाइल्ड हेल्थ

प्राप्त जानकारी के अनुसार मदर्स लैप, मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर का काम शुरू किया जा चुका है। यह कुछ ही महीनों में अपनी सेवाएं देना शुरू कर देगा। मदर्स लैप, मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर में स्त्री रोग से संबंधित सभी बीमारियां जैसे ओवरी सिस्ट, पेल्विक पेन, एंडोमेट्रियोसिस, यूरिनरी फाइब्रॉयड, पॉलिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम पीसीओएस, एक्ने व असमान्य हेयर ग्रोथ, जेनेटल ट्रैक्ट इंफेक्शन, वजाइनल स्किन डिसॉडर, बांझपन से जुड़ी समस्यायें, सभी तरह की इंफर्टिलिटी जाचें, ओवल्यूशन इंडक्शन आदि जैसी समस्याओं का इलाज कुशल विशेषज्ञों की देख-रेख में किया जाएगा। इसके साथ ही नवजात बच्चों और प्रसूति विभाग की सभी आधुनिक सेवाएं आपको एक ही छत के नींचे प्राप्त हो सकेंगी।

बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधायें

सेंटर के बारे में बात करते हुए मदर्स लैप, मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर की डायरेक्टर

Monday, 13 June 2022

ना हो निराश मदर्स लैप है आपके साथ

मातृत्व का अहसास किसी भी हाल में जुबान से बयां नहीं किया जा सकता। मां बननें का सपना हर एक शादीशुदा महिला देखती है। व्यस्तम जीवनशैली और महिलाओं के कामकाजी होने या बांझपन के चलते भी महिलाओं के लिए संतान सुख अब परेशानियों को सबब नहीं रहा। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी आईवीएफ एक ऐसी तकनीक है जिसमें महिलाओं मंे कृतिम गर्भाधान किया जाता है।

यह तकनीक महिलओं के लिए वरदान साबित हुई है। बीते दशक में इस तकनीक के प्रयोग बेहद बढ गया है। भागदौड और तनाव भरी जिंदगी में बांझपन और किराए की कोख यानी सरोगेट मदर्स का चलन भी बढा है। बहुत से महिलाएं ओवम यानी अंडाणु न बननाए गर्भाशय का कमजोर होनाए थ्रेटंड एबरेशन और हेबिचुअल मिसकेरिज जैसे मामलों के कारण मां नही बन पातीं थी।

महिलाओं में 30 के बाद और पुरूषों में 35 वर्ष के बाद प्रजनन क्षमता कम होने लगती है। आयु बढने के साथ ही महिलाओं में डिम्ब ग्रंथियों से स्त्री बीज कम संख्या में उत्सर्जित होने लगते हैं और वे आसानी से निषेचित नहीं होते हैं। साथ ही जीन